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MATA KATYAYANI AARTI VRAT KATHA PUJA VIDHI

Sixth Day of Navratri 2017 - Maa Katyayani aarti, vrat katha, and puja vidhi in Hindi and English:

Maa Katyayani Aarti in Hindi

जय जय अंबे जय कात्यायनी ।
जय जगमाता जग की महारानी ।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा ।
वहां वरदाती नाम पुकारा ।।

कई नाम हैं कई धाम हैं ।
यह स्थान भी तो सुखधाम है ।।

हर मंदिर में जोत तुम्हारी ।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी ।।

हर जगह उत्सव होते रहते ।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते ।।

कात्यायनी रक्षक काया की ।
ग्रंथि काटे मोह माया की ।।

झूठे मोह से छुड़ानेवाली ।
अपना नाम जपानेवाली ।।

बृहस्पतिवार को पूजा करियो ।
ध्यान कात्यायनी का धरियो ।।

हर संकट को दूर करेगी ।
भंडारे भरपूर करेगी ।।

जो भी मां को भक्त पुकारे ।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे ।।

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Maa Katyayani Mantra in Hindi

चन्द्रहासोज्जवलकराशाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

Maa Katyayani Vrat Katha in Hindi

नवरात्रि के छठे दिन देवी के छठे स्वरूप मां कात्यायिनी का पूजन किया जाता है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं।

देवी कात्यायनी जी के संदर्भ में एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ॠषि हुए तथा उनके पुत्र ॠषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ॠषि कात्यायन उत्पन्न हुए थे. देवी कात्यायनी जी देवताओं ,ऋषियों के संकटों कोदूर करने लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में उत्पन्न होती हैं. महर्षि कात्यायन जी ने देवी पालन पोषण किया था. जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था और ॠषि कात्यायन ने भगवती जी कि कठिन तपस्या, पूजा की इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं. महर्षि कात्यायन जी की इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें. देवी ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार की तथा अश्विन कृष्णचतुर्दशी को जन्म लेने के पश्चात शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी, तीन दिनोंतक कात्यायन ॠषि ने इनकी पूजा की, दशमी को देवी ने महिषासुर का वध किया ओर देवों को महिषासुर के अत्याचारों से मुक्त किया.माँ कात्यायिनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है. ये अपनी प्रिय सवारी सिंह पर आरूढ रहती हैं. इनकी चार भुजाएं भक्तों को वरदान देती हैं. इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है. तो दूसरा वरदमुद्रा में है. अन्य हाथों में तलवार और कमल का फूल है. 

इनका गुण शोध कार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायिनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं।

शुभ रंग: लाल  

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Maa Katyayani Puja Vidhi in Hindi

दुर्गा पूजा (Durga Puja) के छठे दिन प्रात: जल्दी उठ स्नान कर देवी कात्तायिनी का ध्यान करना चाहिए. इसके पश्चात पहले दिन की तरह कलश और उसमें उपस्थित सभी देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए. कलश पूजा के बाद देवी कात्तायिनी की पूजा कर शहद का भोग लगाना चाहिए. हाथों में पुष्प लेकर माता के ऊपर दिए गए मन्त्रों का जाप करते हुए उन पर पुष्प अर्पित करने चाहिए.

Origin - It is believed that to kill the demon, Mahishasura, Maa Parvati got into the form of Goddess Katyayani. This form of Goddess Parvati is said to be the most violent of all and she is also recognized as the Warrior Goddess with this form. 

Planet Brihaspati is believed to be governed by Maa Katyayani. 

‘Katyayani’ is the sixth form of Mother Durga who is worshipped by the devotees on the sixth day of Navratri. According to ancient legends and Hindu scriptures, she was born as the daughter to Katyayana Rishi. 

Katyayana rishi was born in the Katya lineage. This lineage originated from Rishi Vishwamitra. She was thus named Katyayani meaning the “daughter of Katyayana". 

Other legends say that it was Rishi Katyayana who first started worshipping her and hence she came to be known as Katyayani. She rides a lion and is four armed. 

In both her left arm she holds a lotus and a sword respectively. Both her right arms are in the gesture of blessings. 

Beej MANTRA in English

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

Om Devi Katyayani Namaha॥ 

Puja Vidhi in English

On the sixth day of Navratri, get up early in the morning, have bath and do dhyan of Devi Katyayani. After that worship kalash and all gods and goddess established in it. Now perform the puja of Devi Katyayani and offer Honey as bhog. With flowers in hand shower flowers on Mata with chanting of Mantras given above. 

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